Wednesday, 20 July 2011

ये कोई सौदा नहीं है कोई समझौता नहीं

एक अरसा हो गया है,  बेधड़क  सोता नहीं
दिल  भरा बैठा हुआ है टूट कर रोता नहीं 
किसे कहते हाले दिल किसको सुनाते दास्ताँ
कफ़स का पहलू कोई दीवार सा होता नहीं
दूर हो कर भी मरासिम इस तरह ज़िंदा रहे
मै इधर जागूँ अगर तो वो उधर सोता नहीं
इश्क हो तो खुद-ब-खुद  हस्सास लगती है फिजाँ
कोई   दरिया,  पेड़,  बादल   चाँदनी बोता नहीं
तुम हमें चाहो न चाहो हम तुम्हारे हैं सदा 
ये कोई सौदा नहीं है कोई समझौता नहीं

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